ढाकाः बांग्लादेश नेशलनिस्ट पार्टी (बीएनपी) के चेयरमैन तारिक रहमान ने शनिवार को पहली प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने भारत-बांग्लादेश के बीच संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल का एक लाइन में जवाब दिया। तारिक रहमान से एक पत्रकार ने पूछा कि आप भारत और बांग्लादेश के संबंधों को आगे किस तरह बढ़ाना चाहेंगे। इसका उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया। इस सवाल पर तारिक ने कहा कि हमारे लिए बांग्लादेश और बांग्लादेश के लोग प्रथम हैं। इसलिए बांग्लादेश और उसके लोगों के लिए जो बेहतर होगा। उसी अनुसार हमारी विदेश नीति तय होगी।
एक अन्य पत्रकार ने पूछा कि वह भारत-पाकिस्तान और चीन के बीच संबंधों में किस तरह संतुलन बनाएंगे...इस सवाल से भी तारिक बचते हुए नजर आए। उन्होंने यह कहकर सवाल का जवाब टाल दिया कि इसका उत्तर पहले ही दिया जा चुका है।
तारिक रहमान ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति और कानून व्यवस्था हमारे लिए चुनौती है। हम इसे बेहतर करने की कोशिश करेंगे। हमारा प्रयास गुड गवर्नेंस देना होगा। चीन के साथ संबंधों पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि चीन पहले से ही बांग्लादेश में कई विकास योजनाओं में शामिल है। हमें उम्मीद है कि हम आगे मिलकर इस दिशा में और बेहतर काम करेंगे।
एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि बांग्लादेश में 2024 में आंदोलन करने वाले लोगों की लगातार ये मांग है कि शेख हसीना को फांसी दी जाए जो फिलहाल भारत में हैं। क्या आप भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करेंगे। इस पर तारिक रहमान ने बहुत छोटा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह लीग प्रोसेज पर डिपेंड करेगा।
तारिक रहमान 36 साल बाद बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। इससे पहले 36 साल तक उनकी मां खालिदा जिया और आवामी लीग की लीडर शेख हसीना का शासन रहा है। इस प्रकार लंबे समय बाद बांग्लादेश को पुरुष प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। बीएनपी ने 299 सीटों वाले सदन में 212 सीटों पर बंपर जीत दर्ज कर 20 साल बाद सत्ता में वापसी की है। वहीं उसकी प्रतिद्वंदी रही जमात-ए-इस्लामी गठबंधन को 76 सीटें मिली हैं। जबकि शेख हसीना की आवामी लीग पार्टी के चुनाव लड़ने पर बैन लगा होने से वह इसमें हिस्सा नहीं ले सकी थी।
तारिक रहमान की प्रेसवार्ता के दौरान बीएनपी नेता अमीर खसरू महमूद चौधरी ने बांग्लादेश भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को संतुलित करने सवाल पर कहा, "हमारी नीतियां देश-केंद्रित नहीं होंगी, बल्कि सभी देशों के लिए एक ही विदेश नीति होगी। इसमें म्यूचुअल इंट्रेस्ट, म्यूचुअल रेस्पेक्ट और म्यूचुअल स्ट्रैटेजी पर आधारित होगी। यह नीति सभी देशों के साथ लागू होगी।
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